मुग़ल बादशाह जहाँगीर से सम्बंधित महत्वपूर्ण History Notes Pdf

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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में आपको मुग़ल बादशाह जहाँगीर से सम्बंधित महत्वपूर्ण History Notes Pdf मिलेंगे और यहाँ आपको Daily Current Affairs के प्रश्न भी मिलेगे . तो आईये साथ मिलकर आपकी तैयारी को बेहतर बनाते है

इस पोस्ट में लिखित मुग़ल बादशाह जहाँगीर के ये प्रश्न परीक्षा में जरूर आयेंगे रट लो इन प्रश्नों को . क्या आपको पता है की सबसे बड़ा मुग़ल बादशाह कौन था और उसकी जन्म कुंडली क्या है या थी तो दोस्तों इस पोस्ट में आपको ग्रेट मुग़ल बादशाह ‘जहाँगीर ‘ के बारे में पूरा विवरण मिलेगा अगर आप चाहो तो इस पोस्टसे Releted कुछ Modal Test Paper भी देकर अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हो …

कौन था ‘जहाँगीर’

जहांगीर का शाब्दिक अर्थ है, ‘विश्व विजेता’ जहाँगीर के बचपन का नाम सलीम था।

ऐसा माना जाता है कि सूफी सन्त शेख सलीम चिश्ती के आशीर्वाद से पैदा हआ था। इसलिए अकबर ने उसका नाम सलीम रखा।

अकबर सलीम को प्यार से शेखो बाबा कहता था।

महतवपूर्ण तथ्य

• जहाँगीर के बचपन का नाम ‘सलीम’ था अकबर सलीम को प्यार से शेखो बाबा कहता था।

• अकबर की मृत्यु के बाद सलीम ने 1605 ई. में आगरे के किले में अपना राज्याभिषेक करवाया था और ‘नुरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाह गाजी’ की उपाधि ली

• जहाँगीर के काल में ही उसकी पत्नी नूरजहाँ ने अपने पिता एतमाद्दौला का मकबरा आगरा में बनवाया था। इस इमारत के निर्माण में पहली बार व्यापक पैमाने पर संगमरमर का प्रयोग है। इसी इमारत में पहली बार पैत्रादुरा शैली का प्रयोग किया गया है। जहाँगीर का मकबरा लाहौर में राबी नदी के किनारे ‘शहदरा’ नामक स्थान पर है। जहाँगीर के काल में शहजादों को दिये जाने वाले सर्वोच्च पद मनसबों की संख्या 7000 सवार से 40,000 सवार के बीच कर दी गयी। शाहजहाँ के काल में यह संख्या बढ़कर 60,000 सवार तक हो गयी। जहाँगीर ने मनसबदारी व्यवस्था के अन्तर्गत एक नया पद द्वि-अस्पा-सिंह सृजित किया जिसके अनुसार इस पद को प्राप्त करने वाले मनसबदार को अपने साथ निश्चित संख्या में घुड़सवार रखने पड़ते थे। जहाँगीर ने अपनी पत्नी नूरजहां का भी नाम अपने सिक्कों में शामिल किया। जहाँगीर के सिक्कों पर 12 हिन्द्र राशियों के प्रतीक चिन्ह अंकित है।

• जहाँगीर भी अपने पिता अकबर की भांति धर्म सहिष्णु शासक हुआ उसने अपने कक्ष में ‘माँ मरियम’ एवं प्रभु ईसा मसीह’ का चित्र भी लगवाया। जहाँगीर अपने राज्याभिषेक के 7वें वर्ष (1612 ई.) पहली बार ‘रक्षाबन्धन’ का त्यौहार मनाया। जहाँगीर इसे (रक्षाबन्धन को) निगाह-ए-दस्त’ कहता है। जहाँगीर ने अपने राज्याभिषेक के 11वें वर्ष में पहली बार शिवरात्री का त्यौहार मनाया। इस दिन योगियों एवं नागा संन्यासियों के साथ धार्मिक चर्चाए की। राजनीतिक कारणों के चलते 5वें सिक्ख गुरु अर्जुनदेव की हत्या करवा दिया।

• जहाँगीर का युग चित्रकला का स्वर्ण युग था तथा जहाँगीर स्वयं भी चित्रकला का पारखी था। जहाँगीर ने कहा कि “यदि मेरे दरबार के समस्त चित्रकार मिलकर भी एक चित्र बना दे तो भी चित्र देखकर मैं यह बता सकता हूँ कि चित्र का कौन सा भाग किस चित्रकार ने बनाया है।”

• सलीम ने 1605 ई. में आगरे के किले में अपना राज्याभिषेक करवाया तथा ‘नुरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाह गाजी’ की उपाधि ली।

• जहाँगीर की पत्नी मानवाई जिसे ‘शाहबेगम’ की उपाधि मिली थी उसने आत्म हत्या की थी।

• मारवाड़ के शासक उदयसिंह की पुत्री जोधाबाई अथवा जगतगोसाई जिसका पुत्र खुर्रम था इसे बाद में शाहजहाँ की उपाधि मिली।

• नूरजहां के बचपन का नाम मेहरुन्निसा था इसके पिता का नाम गयासवेग था इसकी उपाधि एतमाउद्दौला थी।

• मेहरुनिसा की माँ अस्मत बेगम थी जिन्हें गुलाब के इत्र का आविष्कर्ता माना जाता है। मेहरुन्निसा का भाई आसफ खाँ था जिसकी पुत्री अर्जुमन्दबानो बेगम (मुमताज महल) थी जिसका विवाह खुर्रम (शाहजहाँ) के साथ हुआ था।

• नूरजहाँ का पूर्व पति अली कुली बेग इस्तालजू (शेर अफगान) था इसकी पुत्री लाड़ली बेगम थी।

• जहाँगीर ने तमगा व मीर बहरी आदि करों को समाप्त कर दिया।

• जहाँगीर ने मद्यनिषेध लागू किया तथा शराब की बिक्री तथा तम्बाकू की खेती पर प्रतिबन्ध लगाया।

• सप्ताह के दो दिनों रविवार (अकबर का जन्म दिन) तथा वृहस्पतिवार (जहाँगीर के राज्याभिषेक का दिन) पर पशबध एवं मास भक्षण का प्रतिबन्धित कर दिया। जहाँगीर ने आगरा में न्याय की जंजीर टंगवाई।

• जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तजक-ए-जहाँगीरी’ फारसी भाषा में लिखी।

• नूरजहाँ ने अपने पिता एतमाउद्दौला का मकबरा आगरा में बनवाया था। इस इमारत के निर्माण में पहलीबार संगमरमर का प्रयोग हुआ इसी इमारत में पहली बार पैत्रादुरा शैली का प्रयोग हुआ।

• जहांगीर का मकबरा लाहौर में रावी नदी के किनारे ‘शहदरा’ नामक स्थान पर है।

• दो अस्पा एवं सिंह अस्पा जहाँगीर ने चलायी थी। इसके अन्तर्गत बिना जात पद बढ़ाये ही मनसबदारों को अधिक सेना रखनी पड़ती थी।

• दो अस्पा – इसमें मनसबदारों को अपने ‘सवार’ पद के दुगुने घोड़े रखने पड़ते थे।

• सिंह अस्पा- इसमें मनसबदारों को अपने सवार पद के तीन गुने घोड़े रखने पड़ते थे।

• विलियम हॉकिंस जहाँगीर के दरबार में भेजा जाने वाला ब्रिटिश राजा जेम्स प्रथम का अंग्रेज राजदूत तथा मुगल दरबार में उपस्थित होने वाला पहला अंग्रेज था। 1608 ई. हॉकिंस को अंग्रेज कम्पनी के लिए व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त करने हेतु मुगल सम्राट जहाँगीर के पास राजदूत बनाकर भेजा गया सम्राट जहाँगीर हॉकिंस से कॉफी प्रसन्न हुआ, उसने हॉकिंस को इंग्लिश खाँ की उपाधि देकर आर्मीनिया की एक स्त्री से उसका विवाह कर दिया।

• ब्रिटिश राजदूत के रूप में सर टॉमस रो जहाँगीर के शासन काल में आया था।

• टॉमस ने ब्रिटेन के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में 18 सितम्बर, 1615 ई. को सूरत पहुँचा जनवरी 1616 ई. में वह अजमेर में जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ। टॉमस रो मुगल दरबार में आया था उसे बादशाह के साथ मांडू अहमदाबाद, अजमेर जैसे अनेक स्थानों पर जाने का अवसर मिला। वह बादशाह के साथ शिकार खेलने भी गया था।

• मुगल बादशाह बाबर और जहाँगीर के मकबरे भारत में नहीं है ये मकबरे क्रमशः काबुल अफगानिस्तान व शहदरा पाकिस्तान में है।

• मुगल चित्रकला जहाँगीर के काल में अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गयी।

• जहाँगीर ने अबुल हसन को ‘नादिर-उल-जमा’ की उपाधि दिया था।

• जहाँगीर ने उस्ताद मंसूर को ‘नादिर-उल-अश्र’ की उपाधि से सम्मानित किया था।

1. आमेर के शासक भगवानदास की पुत्री मानवाई जिसे शाहबेगम की उपाधि मिली थी। and इसी का पुत्र खुसरो था। जहाँगीर की बुरी आदतों से उबकर मानबाई ने हत्या कर ली। मानबाई और उसके पुत्र खुसरो का मकबरा इलाहाबाद में है।

2. मारवाड़ के शासक उदयसिंह की पुत्री जोधाबाई अथवा जगतगोसाई जिसका पुत्र खुर्रम था इसे बाद में शाहजहाँ की उपाधि मिली।

3. साहिब-ए-जमाल जिसका पुत्र परवेज था।

4. एक रखैल जिसका पुत्र शहरयार था।

5. मेहरुन्निसा जिसे जहाँगीर ने क्रमशः नूरमहल तदुपरान्त नूरजहाँ की उपाधि दी।

मुगल काल के रोचक तथ्य

कौन थी नूरजहाँ :-

नूरजहाँ के बचपन का नाम मेहरुन्निसा था इसके पिता का नाम गयासबेग था, जिसकी उपाधि एत्माउद्दौला थी। मेहरुन्निसा की माँ अस्मत बेगम थी जिन्हें गुलाब के इत्र का आविष्कर्ता माना जाता है। मेहरुन्निसा का भाई आसफ खां था जिसकी पुत्री अर्जुमन्दबानो बेगम (मुमताज महल) थी जिसका विवाह खुर्रम (शाहजहाँ) के साथ हुआ था। वस्तुतः मेहरुन्निसा का पूर्व पति अली कुली वेग इस्तालजू (शेर अफगान) था इसकी पुत्री लाड़ली बेगम थी। शेर अफगान की मृत्यु के पश्चात् मेहरुन्निसा से जहाँगीर ने विवाह कर लिया मेहरुन्निसा ने लाड़ली बेगम का विवाह जहाँगीर के नालायक पुत्र शहरयार से कर दिया।

• जहाँगीर ने अपने राज्याभिषेक के समय 12 राजाज्ञाएँ जारी की जिनमें 5 प्रमुख है

1. जहाँगीर ने तमगा एवं मीर बहरी आदि करों को समाप्त कर दिया।

2. जहाँगीर ने मद्यनिषेध लागू किया तथा शराब की बिक्री तथा तम्बाकू की खेती पर प्रतिबन्ध लगाया (While की जहाँगीर खूब शराब पीता था उसने अपना चित्रांकन अपने सिक्कों पर शराब पीते करवाया था।)

3. जहाँगीर ने कठोर अमानवीय सजाओं अंग-बंग यातनाओं आदि को प्रतिबन्धित कर दिया।

4. सप्ताह के दो दिनों रविवार (अकबर का जन्म दिन) तथा वृहस्पतिवार (जहाँगीर के राज्याभिषेक का दिन) पर पशुबध एवं मांस भक्षण को प्रतिबन्धित कर दिया।

5. आगरा में न्याय की जंजीर टंगवाई।

मुग़ल काल की प्रमुख राजनितिक घटनाएँ :-

खुसरो का विद्रोह (1606 ई.) –

वस्तुतः जहाँगीर ने 1599 ई. में अपने पिता की अवज्ञा की थी और इलाहाबाद चला आया था जहाँगीर की बढ़ती हुई नकारात्मक गतिविधियाँ एवं विलासी प्रवृत्तियों से ऊबकर मानवाई ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। चूंकि जहाँगीर का पुत्र खुसरो अपनी माँ की हत्या का दोषी अपने पिता जहाँगीर को मानता था। अतः जहाँगीर के सिंहासनावरोहण के कुछ माह पश्चात् ही उसने विद्रोह कर दिया। बाद में खुसरो को गिरफ्तार करके खुर्रम के हवाले कर दिया गया बाद में खुर्रम ने खुसरों की हत्या कर दी। खुसरो को इलाहाबाद में खुसरोबाग में अपनी माँ मानबाई की कब्र के बगल में दफना दिया गया है। चूंकि पांचवें गुरु अर्जुनदेव ने खुसरो को विजय का आशीर्वाद दिया था अतः जहाँगीर ने अर्जुनदेव को मृत्यु दण्ड दे दिया और यहीं से मुगलों को सिक्खों के साथ सम्बन्ध खराब हो जाते हैं।

मेवाड़ अभियान (1615 ई.) –

जहाँगीर के काल की सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना 1615 ई. में मेवाड़ के शासक राणा अमरसिंह के साथ की गयी सम्मान जनक सन्धि। अन्ततः 1615 ई. में शाहजादा खुर्रम मेवाड़ के शासक राणा अमरसिंह के साथ एक सम्मान जनक सन्धि कर पाने में सफल रहा। 1627 में लगातार अस्वस्थता के चलते जहाँगीर की मृत्यु हो गयी जहाँगीर का मकबरा लाहौर में है, ठीक इसी समय शहरयार ने खुद को स्वतन्त्र घोषित कर दिया परन्तु आँसफ खाँ ने शहरयार को नष्ट करके खुसरो के पुत्र दाबर बख्श को गद्दी पर बैठाकर शाहजहां को दक्षिण से बुलाया। जहाँगीर ने फारसी भाषा में अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहाँगीरी लिखी। जहाँगीर ने अपने जीवन के आरम्भिक जीवन के 17 वर्षों का विवरण लिखा है। इसके बाद का विवरण मौतमिद खाँ ने लिखा है। वास्तव में मौतमिद् खाँ जहाँगीर का दरबारी इतिहासकार था इसके द्वारा लिखित पुस्तक ‘इकबालनामा-ए-जहाँगीरी के नाम से जानी जाती है।

जहाँगीर के दरबार के प्रमुख चित्रकार :-

अबुल हसन :-

1. अबुल हसन- यह जहाँगीर के दरबार का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार था जिसे जहाँगीर ने ‘नादिर-उल-जमा’ की उपाधि दी अर्थात् अपने युग का आश्चर्य।

उस्ताद मंसूर :-

2. उस्ताद मंसूर- यह जहाँगीर के दरबार का द्वितीय सर्वश्रेष्ठ चित्रकार था जिसे जहाँगीर ने ‘नादिर-उल-अश्र’ की उपाधि दी मंसूर फूल पत्ती एवं पशु पक्षियों के चित्र विशेषज्ञ था। उसका एक प्रसिद्ध चित्र ‘साइबेरियन सारस’ था।

बिशनदास :-

3. बिशनदास- बिशनदास मानक चित्रों अथवा छवि चित्रों अथवा छायाचित्रों का विशेषज्ञ था जिसे जहाँगीर ने ईरान के शाह का चित्र बनाने के लिए उसे उसके दरबार में भेजा था।

मनोहर :-

4. मनोहर- मनोहर शिकार चित्रों का विशेषज्ञ था तथा फूलपत्ती एवं पशु पक्षियों के चित्र बनाता था।

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